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मैं जीने का हुनर खोने लगा हूँ

मैं जीने का हुनर खोने लगा हूँ जमीनों में हवास बोने लगा हूँ इन अखबारों से दर लगने लगा है सो मैं अब देर तक सोने लग हूँ हंसी आती थी पहले अंशुओ पर मगर अब बेसबब रोने लगा हूँ मेरी खुद्द्रियाँ थकने लगी हैं मैं तोफे पा के खुश होने लगा हूँ ** मेराज फैजाबादी**
मैं जीने का हुनर खोने लगा हूँ मैं जीने का हुनर खोने लगा हूँ Reviewed by हिंदी न्यूज़ on December 08, 2018 Rating: 5

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